बिजली कटौती को लेकर जनता में भारी आक्रोश

जौनपुर नामा
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बरसात व तेज़ हवा के चलने के अंदेशे में ठप कर दी जाती है सप्लाई

मीर बेलाल‌ जानी
जौनपुर। बरसात होने के पहले ही मेंटेनेंस पूर्ण कर लिए जाने के बाद भी पड़ रही भीषण गर्मी के मौसम में अघोषित बिजली कटौती से जनता में विद्युत विभागीय कर्मचारियों के प्रति दिन ब दिन आक्रोश बढ़ता जा रहा है। अगर विद्युत विभागीय कर्मचारियों की मनमानी इसी तरह चलती रही तो वह दिन दूर नहीं जब जनता आक्रोशित होकर सड़कों पर निकल आए और चक्का जाम कर विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से की जाए यह मांग करते हुए सड़कों पर बैठ जाए जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो और विद्युत कर्मचारियों से तीखी नोंकझोंक होते-होते मामला कहीं तूल न पकड़ ले जो न ही जनता के लिए अच्छा है और न ही कर्मचारियों के हक में अच्छा साबित होगा।

बता दें ऐसे तो कई दिनों से लगातार शहर में दिन हो रात कब बिजली आयेगी या चली जाएगी इस बात की किसी को कोई खबर नहीं होती है। जबकि नियमानुसार किन कारणों से विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी और कितने समय बाद आपूर्ति किया जाएगा।इसकी जानकारी पहले ही जनता को विभिन्न माध्यमों से पहले देना होता है। लेकिन विद्युत विभाग के सम्बंधित कर्मचारियों द्वारा नियम के उलट कार्य करने की जैसे आदत बन गयी है। जिसका खामियाजा भोली भाली जनता को बिजली से सम्बंधित विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का‌ सामना कर के चुकाना पड़ता है। 
हालांकि कभी-कभी जानकारी करने के लिए क्यों बिजली आपूर्ति बाधित है और कब तक सुचारू रूप से चलना शुरू होगी। इसके लिए एक्सईन, एसडीओ,और सर्किल जेई के सीयूजी नंबर पर फोन लगा-लगा कर लोग थक जाते हैं लेकिन फोन दिन के समय में कभी रिसीव कर लिया जाता है। लेकिन रात्रि के समय में सवाल ही नहीं उठता चाहे घंटी बजती रहे। हां एक आवाज मोबाइल से अवश्य सुनने को मिल जाती है कंप्यूटर द्वारा की नेट्वर्किंग दिक्कत है और इंगेज टोन द्वारा।

जोभी हो इन दिनों गोमती नदी के इस पार के फीडर हो या उस पार के फिडर हो किसी फिडर से सरकार के आदेशानुसार विद्युत आपूर्ति सुचारू रूप से नहीं की जारही है। जिसके चलते जनता का आक्रोश धीरे धीरे विद्युत कर्मचारियों के प्रति बढ़ता जा रहा। अगर समय रहते विद्युत के सम्बंधित कर्मचारियों द्वारा अपनी मनमानी का परिचय देते हुए कभी ग्यारह हजार लाइन का फाल्ट कभी लोकल फाल्ट आदि को बताकर जिस तरह जनता के जज़्बात के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। वह दिन दूर नहीं जब जनता समय आने पर यानी कभी चेकिंग, कभी बकाए वसूली आदि के नाम पर क्षेत्रों में विजिलेंस टीम के साथ चलने के बावजूद सबक सिखाने में कोई कोर कसर बाकी न रखे। यह भी नहीं सोचेगी कि इसका अंजाम क्या होगा। जनता इस कदर विद्युत कर्मचारियो की कार्य शैली से आक्रोशित है।
यह सभी को पता है कि बारिश के बाद हुई तेज धूप के कारण उमस भरी गर्मी विकराल रूप धारण कर लिया करती है। उसके बाद भी लगातार दो दिन से बिजली की अघोषित कटौती लगभग 14 घंटे से पन्द्रह घंटे गुल रहने से घरों में लगे इनवर्टरो ने जवाब दे दिया है। विभागीय अधिकारी कर्मचारी इतने लापरवाह हैं कि उन्हें जनता की तकलीफों से जैसे कोई सरोकार ही नहीं है। इधर शाम के समय जब भी बारिश होने की संभावना होती है या तेज हवा चलते ही अनुमान लगा कर बिजली आपूर्ति ठप कर दी जाती है। 

ज्ञात हो कि प्रदेश में मांग से ज्यादा बिजली उत्पादन होने के बावजूद गर्मी आते ही अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला हमेशा की तरह शुरू होना जैसे किसी परम्परा का हिस्सा हो। इसी कारण बिजली की अघोषित कटौती करना विद्युत कर्मचारियों के लिए अति आवश्यक हो गया है। अभी कुछ दिन हुए हैं जब मेंटेनेंस के नाम पर कर्मचारियों द्वारा इस दौरान पेड़ की टहनियां काटी गई थीं वहीं झूलते तार को सही किया गया था। कि मुख्य रूप से  तार के टूटने से किसी प्रकार विद्युत आपूर्ति बाधित न हो। लेकिन मेंटेनेंस के बाद भी बिजली किन कारणों से काटी जाती है यह विभागीय अधिकारी बताना मुनासिब नहीं समझते।

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