मोहर्रम का चांद दिखते ही शहर के शिया बहुल इलाकों में मजलिसों और मातमो का दौर आरंभ हो गया हर और से या हुसैन हाय हुसैन की आवाज़ें सुनाई देने लगी इसी क्रम में पहली मोहर्रम को चहारसू स्थित शेख नूरुल हसन मेमोरियल सोसायटी कार्यालय पर विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी मजलिस का आयोजन किया गया मजलिस को जाकिर ए अहलेबैत जनाब डॉक्टर अबरार हुसैन ने संबोधित किया उन्होंने कहा कि पैगंबर इस्लाम हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हज़रत इमाम हुसैन अ,स, ने यजीदी फौज से हिंदुस्तान,हिंद ,जाने की ख्वाहिश जाहिर किया था यजीद की फौज ने हज़रत इमाम हुसैन को हिंदुस्तान जाने के लिए रास्ता नहीं दिया और उन्हें घेर कर कर्बला ले गए वहीं पर जालिमों ने 3 दिन का भूखा और प्यास हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों को कत्ल कर दिया यहां तक की 6 माह के बच्चे अली असगर को भी जालिमों ने नहीं बख्शा मसायब को सुनकर सैकड़ो की संख्या में उपस्थित लोगों की आंखें नम हो गई बात खत्म मजलिस अंजुमन कासिमिया चहारसू के नईम हैदर उर्फ मुन्ने के नेतृत्व में नौहा और मातम किया गया मजलिस के आयोजन समाजसेवी शेख अली मंज़र डेज़ी ने तबरूक तकसीम किया
पहली मोहर्रम पर मजलिस आयोजित हज़रत इमाम हुसैन अ.स हिंदुस्तान आना चाहते थे: डॉक्टर अबरार हुसैन
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जुलाई 09, 2024
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