बज़्म पैग़ामे मोहब्बत के जानिब से तरही नशिस्त का आयोजन

जौनपुर नामा
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मछली शहर (जौनपुर)। स्थानीय नगर के मोहल्ला खानज़ादा में इबरत मछली शहरी के आवास पर बज़्म पैग़ामे मोहब्बत के जानिब से गुरुवार की रात एक तरही नशिस्त का आयोजन किया गया।

नशिस्त की अध्यक्षता बाबू उर्फ़ (दूड़ी) ने की नशिस्त की शुरुआत हनीफ मछली शहरी के नातिया कलाम से हुयी
इस के बाद तमाम शायरों ने एक से बढ़ कर एक कलाम पेश करके श्रोताओं का मन मुग्ध कर दिया।
इबरत मछली शहरी ने सुनाया..

मैं जो छुँऊ हाथों से इबरत फूल भी काटा बन जाये।
उनके पाँव के नीचे आये तो सब्ज़ा भी मखमल है।।

हनीफ मछली शहरी 
किस का दामन ढूंढ़ रहा है सोच हनीफे नादां तू।
जिस का कोई मोल नहीं है बस वो माँ का आँचल है।।

 साबिर मछली शहरी 
दोनों के सम्मान हैँ कितने दोनों कितने बा बरकत।
मेरे घर में आबे ज़मज़म आपके घर गंगा जल है।।

इम्तियाज़ खां 
उसके कुंवारे जिस्म की खुशबु बस गयीं मेरी साँसो में।
ऐसा मुझे लगता है उसका सारा बदन ही संदल है।।

सैफ मछली शहरी 
ज़िंदा रहने की है तलब तो मौत से फिर क्या डरना।
जीने को तो उम्र पड़ी है मरना तो बस इक पल है।।

कार्यक्रम का संचालन इम्तेयाज़ खां ने किया इसके अलावा शहर के तमाम सम्मानित श्रोता
अली अकबर, हमज़ा ,अरबाज़, मतलूब मास्टर ,पिंटू जायसवाल आदि उपस्थित रहे
नशिस्त के आखिर में अध्यक्ष बाबू उर्फ़ (दूड़ी) ने सभी का धन्यवाद व्यक्त किया।

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